Monday, November 12, 2018

पीएम मोदी ने शुरू की पहली कंटेनर कार्गो सेवा, 36 साल बाद जमीन पर उतरी गंगा जलमार्ग परियोजना


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में देश की पहली कंटेनर कार्गो सेवा की शुरुआत रामनगर बंदरगाह से की। यह बंदरगाह गंगा नदी पर हल्दिया-वाराणसी जलपरिवहन सेवा के तहत बनाया गया है। करीब 36 साल बाद देश की पहली जलपरिवहन परियोजना मूर्त रूप लिया। 1620 किलोमीटर लंबे वाराणसी-हल्दिया इनलैंड वाटर हाइवे का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की। इनलैंड वाटरवेज अथारिटी के अधिकारियों की माने तो इस परियोजना से पांच राज्यों की व्यावसायिक गतिविधियों में न केवल तेजी आएगी बल्कि एक साथ पांच सौ से दो हजार टन मॉल की ढुलाई का काम जलपरिवहन के जरिए हो सकेगा। वाहनों के चलते ध्वनि व वायु प्रदूषण में कमी आएगी और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। 
वर्ष 1982 में जल परिवहन मंत्रालय ने योजना पर काम शुरू किया था। मगर यह परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। वर्ष 2014 में नये सिरे से इस पर काम शुरू हुआ और चार साल के बाद देश में पहली बार कंटेनर कार्गो शुरू होने जा रही है। इस परियोजना के लिए केन्द्र सरकार ने विश्वबैंक से करीब 5700 करोड़ रुपये की मदद ली गई है। योजना के पहले चरण में बनारस, साहेबगंज समेत पांच स्थानों पर बंदरगाह बनाने का काम चल रहा है। इनलैंड वाटर अथारिटी के वाइस चेयरमैन प्रवीर पांडेय के मुताबिक पहले चरण की योजना का काम लगभग पूरा हो चुका है। आने वाले दिनों में 1500 से दो हजार टन के  कंटेनर कार्गों का संचालन होगा। 
2016 में हुआ था ट्रायल
हल्दिया-वाराणसी जलमार्ग परियोजना का ट्रायल वर्ष 2016 में हुआ। तब दो मालवाहक जहाज से कार और भवन निर्माण सामग्री की खेप आई थी। इसके बाद अब 12 नवंबर को राल्हूपुर स्थित बंदरगाह पर एक मल्टीनेशनल कंपनी का उत्पाद लेकर पहुंचा।  
500 टन माल लेकर पहुंचा है मालवाहक जहाज
हल्दिया से 13 सौ किलोमीटर से अधिक दूरी तय करके पांच सौ टन माल लेकर शिपिंग कार्गो गत शुक्रवार को बनारस पहुंचा है। इस कार्गो पर एक मल्टीनेशनल कंपनी का माल मंगाया गया है। इसके पीछे मंशा इस नए जल परिवहन मार्ग को विश्व स्तर पर चर्चा में लाना है ताकि अधिक से अधिक मल्टीनेशनल कंपनियां इस व्यावसायिक परिवहन में दिलचस्पी दिखाएं, बजाय इसके कि उन्हें इसके लिए प्रेरित किया जाए। इस जलमार्ग से 20 टन माल, मात्र 15 हजार में 1318 किलोमीटर दूर तक पहुंचाया जा रहा है। 
क्रेन से अनलोड का किया रिहर्सल
शनिवार को जर्मन क्रेन के जरिए डमी कंटेनर को अनलोड करने का रिहर्सल किया गया। एक तरफ रिहर्सल हो रहा था,  उसी समय गंगा की लहरों पर विशाल कार्गो टैगोर में मौजूद क्रू मेंबर्स में हलचल बढ़ी हुई थी। अनलोडिंग के दौरान सभी जरूरी प्रक्रियाएं दोहाराई गईं। इस दौरान राष्ट्रीय जल परिवहन से लगायत जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी मौजूद थे। 
जेटी का उत्तरी हिस्सा में हेलीपोर्ट में तब्दील 
जेटी के उत्तरी छोर के सौ मीटर स्थल को हेलीपोर्ट में तब्दील किया गया है। पीएम मोदी का हेलीकाप्टर यहीं उतरेगा। हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए दो हेलीपोर्ट मार्क तैयार किए गए हैं। दोपहर करीब तीन बजे हेलीकॉफ्टर की लैंडिग का ट्रायल हुआ। 

खास बातें
-बनारस-हल्दिया जलमार्ग से कई राज्यों की व्यावसायिक गतिविधियां तेज होंगी।
-प्रदूषण कम होगा और सुरक्षित माल पहुंच सकेगा।
-सड़क मार्ग के बजाए सस्ते दर पर एक साथ छह सौ टन माल की ढुलाई हो सकेगी।
-रोड हाइवे का मेन जंक्शन होने और फ्रेट विलेज बनने से वेयर हाउस, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग-रैपिंग, कारगो स्टोरेज, रोड ट्रांसपोर्ट सर्विस सुविधा उपलब्ध होगी।
-फिलहाल गंगा के जलस्तर को देखते हुए पांच सौ टन के मालवाहक जहाज चलेंगे 
-वाराणसी-पटना के बीच कम जलस्तर वाले स्थानों पर ड्रेजिंग का काम शुरू 
-भविष्य में दो हजार टन तक के जहाज चलाने की तैयारी 

रामनगर स्थित बंदरगाह एक नजर में
मल्टीमाडल टर्मिनल पर शुरू हुआ काम : वर्ष 2014
हल्दिया-वाराणसी परियोजना का ट्रायल : वर्ष 2016
पहली बार 16 कंटेनर के साथ पहुंचा कार्गो : 9 नवंबर, 2018
बंदरगार के जेट्टी की लंबाई : 200 मीटर, चौड़ाई 42 मीटर
जेट्टी पर 02 मोबाइल हार्बर क्रेन
अप्रोच मार्ग, आंतरिक मार्ग

Sunday, November 11, 2018

जानिए क्या है भारतीय दंड संहिता की धारा 377 और क्यों है इस पर विवाद

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय खंडपीठ ने समलैंगिकता को अपराध बतानेवाली धारा खत्म कर दिया है। जिसके बाद अब समलैंगिकता अपराध नहीं माना जाएगा।
गौरतलब है सुप्रीम कोर्ट होमोसेक्सुमअल्टी  को अपने एक फैसले में क्रिमिनल एक्ट करार दे चुका है, और इसी फैसले के खिलाफ क्यूकरिटिव पिटिशन दाखिल की गई थी। यह मामला बेहद चर्चित रहा है और विवाद का विषय भी रहा है। आइए जानते है क्या  है धारा 377 और इससे जुड़ी अन्यद खास बातें:
क्या है भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 के तहत 2 लोग आपसी सहमति या असहमति से अप्राकृतिक संबंध बनाते है और दोषी करार दिए जाते हैं तो उनको 10 साल की सजा से लेकर उम्रकैद की सजा हो सकती है। यह अपराध संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है और गैरजमानती है।
किसने दी थी धारा 377 को चुनौती
सेक्स  वर्करों के लिए काम करने वाली संस्थास नाज फाउंडेशन ने दिल्ली हाईकोर्ट में यह कहते हुए इसकी संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया था कि अगर दो वयस्क आपसी सहमति से एकांत में यौन संबंध बनाते है तो उसे धारा 377 के प्रावधान से बाहर किया जाना चाहिए।
 
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 जुलाई 2009 को दिया था फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 जुलाई 2009 को नाज फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने फैसले में कहा कि दो वयस्क आपसी सहमति से एकांत में समलैंगिक संबंध बनाते है तो वह आईपीसी की धारा 377 के तहत अपराध नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने सभी नागरिकों के समानता के अधिकारों की बात की थी।
हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलटा
समलैंगिकता पर दिल्ली हाईकोर्ट के दिए फैसले को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर 2013 को  होमो सेक्सुपअल्टी् के मामले में दिए गए अपने ऐतिहासिक जजमेंट में समलैंगिगता मामले में उम्रकैद की सजा के प्रावधान के कानून को बहाल रखने का फैसला किया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया था जिसमें दो बालिगो के आपसी सहमति से समलैंगिक संबंध को अपराध की श्रेणी से बाहर माना गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा जब तक धारा 377 रहेगी तब तक समलैंगिक संबंध को वैध नहीं ठहराया जा सकता।